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एक विशेष प्रकार का चिंतन है अध्यात्म || आचार्य प्रशांत, रामगीता पर (2020)

2024-09-13 1 Dailymotion

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वीडियो जानकारी: विश्रांति शिविर, 09.05.2020, ग्रेटर नॉएडा, उत्तर प्रदेश, भारत

प्रसंग:
आत्मन्यभेदेन विभावयनिनदं भवत्यभेदेन मयात्मना तदा।
यथा जल॑ वारिनिधौ यथा पय: क्षीरे वियद्वद्योम्न्यनिले यथानिल: ॥ ५४॥

जिस प्रकार समुद्र में जल, दूध में दूध, महाकाश में घटाकाश आदि और वायु में वायु मिलकर एक हो जाते हैं, उसी प्रकार इस संपूर्ण प्रपंचफकों अपने आत्मा के साथ अभिन्‍न रूप से चिन्तन करने से जीव मुझ परमात्मा के साथ अभिन्‍न भाव से स्थित हो जाता है॥ ५४॥
(~रामगीता, श्लोक 54)

~ क्या चिंतन से परमात्मा के साथ अभिन्न भाव से स्थित हुआ जा सकता है?
~ किस प्रकार का चिंतन अच्छा होता है?
~ आध्यात्मिक चिंतन कैसे करें?
~ क्या मन के द्वारा मन से पार जाया जा सकता है?
~ आत्मविचार कैसे किया जाता है?

संगीत: मिलिंद दाते
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